बाबरी मस्जिद: चार घंटे के अंदर पूरी मस्जिद का नामोनिशान मिटाया गया | babri masjid demolished just in four hours read full story: Hindipost News




बाबरी मस्जिद: चार घंटे के अंदर पूरी मस्जिद का नामोनिशान मिटाया गया

Updated on 06 Dec 2017 by Hindipost


                    

अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने को आज पच्चीस साल पूरे हो गए हैं। पच्चीस साल बाद न तो ये विवाद सुलझा है और न ही इसपर राजनीति खत्म हुई है। अब गुजरात में चुनाव से पहले एक बार फिर मुद्दा गर्म है।  आखिर छह दिसंबर को क्या हुआ था?
‘’राम मंदिर आंदोलन की गहमागहमी के बीच शहर में कारसेवकों का भारी जमावड़ा, उनकी भाषा, उनके तेवर और शहर की फिजा देखकर ये एहसास हो चला था कि इस बार सांकेतिक नहीं, बल्कि कुछ होगा। 

सुबह से ही माहौल में गहमागहमी दिख रही थी। भीड़ बढ़ रही थी। करीब 4 से 5 लाख कारसेवक बाबरी मस्जिद के ढांचे के आसपास इकट्ठा हो गए थे।  12 बजे के आसपास बाबरी मस्जिद के पीछले इलाके से कुछ कारसेवक मस्जिद पर चढ़ने में कामयाब हो गए। उनके हाथों में कुदाल थे, फावड़े थे, रस्सियां थीं। छेनी हथौड़े जैसे छोटे मोटे हथियार भी थे। 
चंद कारसेवकों के चढ़ने के साथ ही कारसेवकों की तादाद बढ़ती गई वहा पर। इस तरह पहले गुंबद को गिरा दिया गया। और एक-एक करके तीनों गुंबद गिरा दिए गए। करीब तीन बज चुके थे। उसके बाद जिसके हाथ में जो था, बाबरी मस्जिद के इर्दगिर्द की दीवार को साफ करने में लग गए। डंडे, छेनी, चाकू...सभी से पूरी सफाई की गई। चार घंटे में मस्जिद का नामोनिशान मिटा दिया गया। 
इस दौरान सीता रसोई के पास सुप्रीम कोर्ट के ऑबजर्वर और कुछ अधिकारी भी बैठे थे। उस वक्त के अयोध्या के एसपी वहां के मौजूद थे। जो बाद में बीजेपी के टिकट से सांसद बने। उन्होंने पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने और हवा में गोलियां चलाने के लिए कहा। लेकिन पुलिस ने उसे अनसुनी कर दी। 
इस दौरान उन पत्रकारों पर हमले किए गए जिनके पास कैमरे थे। जब मस्जिद तोड़ी जा रही थी तो माइक और लाउडस्पीकर से नारे लगाए गए थे... एक धक्का और दो,  बाबरी मस्जिद को तोड़ दो। 

इस दौरान राम चबूतरा के पास बीजेपी के कई सीनियर नेता मौजूद थे।  मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, रामकृष्ण परमहंस जैसे नेता मौजूद थे, जबकि आडवाणी चबूतरे के नीचे एक कमरे में चले गए थे। 

तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से मस्जिद की हिफाजत का वादा किया था, इसके साथ ही ये भी कहा था कि मंदिर वहीं बनाएंगे।  रात करीब दो बजे अस्थाई मंदिर का निर्माण किया गया और उसके बाद सीआरपीएफ और आरपीएफ ने कारसेवकों को वहां से हटाया।’’




बाबरी मस्जिद: चार घंटे के अंदर पूरी मस्जिद का नामोनिशान मिटाया गया

Updated on 06 Dec 2017 by Hindipost



              

अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने को आज पच्चीस साल पूरे हो गए हैं। पच्चीस साल बाद न तो ये विवाद सुलझा है और न ही इसपर राजनीति खत्म हुई है। अब गुजरात में चुनाव से पहले एक बार फिर मुद्दा गर्म है।  आखिर छह दिसंबर को क्या हुआ था?
‘’राम मंदिर आंदोलन की गहमागहमी के बीच शहर में कारसेवकों का भारी जमावड़ा, उनकी भाषा, उनके तेवर और शहर की फिजा देखकर ये एहसास हो चला था कि इस बार सांकेतिक नहीं, बल्कि कुछ होगा। 

सुबह से ही माहौल में गहमागहमी दिख रही थी। भीड़ बढ़ रही थी। करीब 4 से 5 लाख कारसेवक बाबरी मस्जिद के ढांचे के आसपास इकट्ठा हो गए थे।  12 बजे के आसपास बाबरी मस्जिद के पीछले इलाके से कुछ कारसेवक मस्जिद पर चढ़ने में कामयाब हो गए। उनके हाथों में कुदाल थे, फावड़े थे, रस्सियां थीं। छेनी हथौड़े जैसे छोटे मोटे हथियार भी थे। 
चंद कारसेवकों के चढ़ने के साथ ही कारसेवकों की तादाद बढ़ती गई वहा पर। इस तरह पहले गुंबद को गिरा दिया गया। और एक-एक करके तीनों गुंबद गिरा दिए गए। करीब तीन बज चुके थे। उसके बाद जिसके हाथ में जो था, बाबरी मस्जिद के इर्दगिर्द की दीवार को साफ करने में लग गए। डंडे, छेनी, चाकू...सभी से पूरी सफाई की गई। चार घंटे में मस्जिद का नामोनिशान मिटा दिया गया। 
इस दौरान सीता रसोई के पास सुप्रीम कोर्ट के ऑबजर्वर और कुछ अधिकारी भी बैठे थे। उस वक्त के अयोध्या के एसपी वहां के मौजूद थे। जो बाद में बीजेपी के टिकट से सांसद बने। उन्होंने पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने और हवा में गोलियां चलाने के लिए कहा। लेकिन पुलिस ने उसे अनसुनी कर दी। 
इस दौरान उन पत्रकारों पर हमले किए गए जिनके पास कैमरे थे। जब मस्जिद तोड़ी जा रही थी तो माइक और लाउडस्पीकर से नारे लगाए गए थे... एक धक्का और दो,  बाबरी मस्जिद को तोड़ दो। 

इस दौरान राम चबूतरा के पास बीजेपी के कई सीनियर नेता मौजूद थे।  मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, रामकृष्ण परमहंस जैसे नेता मौजूद थे, जबकि आडवाणी चबूतरे के नीचे एक कमरे में चले गए थे। 

तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से मस्जिद की हिफाजत का वादा किया था, इसके साथ ही ये भी कहा था कि मंदिर वहीं बनाएंगे।  रात करीब दो बजे अस्थाई मंदिर का निर्माण किया गया और उसके बाद सीआरपीएफ और आरपीएफ ने कारसेवकों को वहां से हटाया।’’







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बाबरी मस्जिद: चार घंटे के अंदर पूरी मस्जिद का नामोनिशान मिटाया गया

Updated on 06 Dec 2017 by Hindipost


              

अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने को आज पच्चीस साल पूरे हो गए हैं। पच्चीस साल बाद न तो ये विवाद सुलझा है और न ही इसपर राजनीति खत्म हुई है। अब गुजरात में चुनाव से पहले एक बार फिर मुद्दा गर्म है।  आखिर छह दिसंबर को क्या हुआ था?
‘’राम मंदिर आंदोलन की गहमागहमी के बीच शहर में कारसेवकों का भारी जमावड़ा, उनकी भाषा, उनके तेवर और शहर की फिजा देखकर ये एहसास हो चला था कि इस बार सांकेतिक नहीं, बल्कि कुछ होगा। 

सुबह से ही माहौल में गहमागहमी दिख रही थी। भीड़ बढ़ रही थी। करीब 4 से 5 लाख कारसेवक बाबरी मस्जिद के ढांचे के आसपास इकट्ठा हो गए थे।  12 बजे के आसपास बाबरी मस्जिद के पीछले इलाके से कुछ कारसेवक मस्जिद पर चढ़ने में कामयाब हो गए। उनके हाथों में कुदाल थे, फावड़े थे, रस्सियां थीं। छेनी हथौड़े जैसे छोटे मोटे हथियार भी थे। 
चंद कारसेवकों के चढ़ने के साथ ही कारसेवकों की तादाद बढ़ती गई वहा पर। इस तरह पहले गुंबद को गिरा दिया गया। और एक-एक करके तीनों गुंबद गिरा दिए गए। करीब तीन बज चुके थे। उसके बाद जिसके हाथ में जो था, बाबरी मस्जिद के इर्दगिर्द की दीवार को साफ करने में लग गए। डंडे, छेनी, चाकू...सभी से पूरी सफाई की गई। चार घंटे में मस्जिद का नामोनिशान मिटा दिया गया। 
इस दौरान सीता रसोई के पास सुप्रीम कोर्ट के ऑबजर्वर और कुछ अधिकारी भी बैठे थे। उस वक्त के अयोध्या के एसपी वहां के मौजूद थे। जो बाद में बीजेपी के टिकट से सांसद बने। उन्होंने पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने और हवा में गोलियां चलाने के लिए कहा। लेकिन पुलिस ने उसे अनसुनी कर दी। 
इस दौरान उन पत्रकारों पर हमले किए गए जिनके पास कैमरे थे। जब मस्जिद तोड़ी जा रही थी तो माइक और लाउडस्पीकर से नारे लगाए गए थे... एक धक्का और दो,  बाबरी मस्जिद को तोड़ दो। 

इस दौरान राम चबूतरा के पास बीजेपी के कई सीनियर नेता मौजूद थे।  मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, रामकृष्ण परमहंस जैसे नेता मौजूद थे, जबकि आडवाणी चबूतरे के नीचे एक कमरे में चले गए थे। 

तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से मस्जिद की हिफाजत का वादा किया था, इसके साथ ही ये भी कहा था कि मंदिर वहीं बनाएंगे।  रात करीब दो बजे अस्थाई मंदिर का निर्माण किया गया और उसके बाद सीआरपीएफ और आरपीएफ ने कारसेवकों को वहां से हटाया।’’