अकबर दी  ग्रेट की कहानी | read story of akbar the great: Hindipost News




अकबर दी  ग्रेट की कहानी

Updated on 01 May 2017 by Hindipost


                    

मुहम्मद अकबर का जन्म १५ अक्टूबर १५४२ को उमेरकोट में हुआ था। अकबर मुगलो में सबसे बड़ा शासक था भारत का। अकबर की ताकत पुरे भारत में फ़ैल चुकी थी और पुरे भारत में मुगलो शासक के दौरान कई इमारते बनाई गई जो आज भी पुरे भारत में मौजूद है। अकबर ने भारत की अर्थव्यवस्था को बेहतर और मज़बूत बनाई थी। अकबर साहित्य के बहुत नज़दीक थे उन्होंने २४००० वॉल्यूम की लाइब्रेरी बनाई जो संस्कृत, हिंदुस्तानी, पर्शियन, ग्रीक, लैटिन और अरबी भाषा में थी। 
अकबर एक बहादुर और शक्तिशाली शासक थे उन्होंने गोदावरी नदी के आस-पास के सारे क्षेत्रो को हथिया लिया था और उन्हें भी मुघल साम्राज्य में शामिल कर लिया था। उनके अनंत सैन्यबल, अपार शक्ति और आर्थिक प्रबलता के आधार पर वे धीरे-धीरे भारत के कई राज्यों पर राज करते चले जा रहे थे। अकबर अपने साम्राज्य को सबसे विशाल और सुखी साम्राज्य बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने कई प्रकार की निति अपनाई जिस से उनके राज्य की प्रजा ख़ुशी से रह सके।

उनका साम्राज्य विशाल होने के कारण उनमे से कुछ हिंदु धर्म के भी थे, उनके हितो के लिए उसने हिंदु सम्राटो की निति को भी अपनाया और मुघल साम्राज्य में लागू किया। वे विविध धर्मो के बिच हो रहे भेदभाव को दूर करना चाहते थे। उनके इस नम्र स्वाभाव के कारण उन्हें लोग एक श्रेष्ट राजा मानते थे। और ख़ुशी-ख़ुशी उनके साम्राज्य में रहते थे। हिन्दुओं के प्रति अपनी धार्मिक सहिष्णुता का परिचय देते हुए उन्होंने उन पर लगा ‘जजिया’ नामक कर हटा दिया। अकबर में अपने जीवन में जो सबसे महान कार्य करने का प्रयास किया, वह था ‘दिन – ए – इलाही’ नामक धर्म की स्थापना। इसे उन्होंने सर्वधर्म के रूप में स्थापित करने की चेष्टा की थी। 1575 में उन्होंने एक ऐसे इबादतखाने (प्रार्थनाघर) की स्थापना की थी, जो सभी धर्मावलम्बियों के लिए खुला था, वो अन्य धर्मों के प्रमुख से धर्म चर्चायें भी किया करते थे।

उनका दरबार सबके लिए हमेशा से ही खुला रहता था। अकबर ने अनेक फारसी संस्कृति से जुड़े चित्रों को अपनी दीवारों पर बनवाया। अपने आरंभिक शासन काल में अकबर की हिन्दुओ के प्रति सहिष्णुता नहीं थी, किन्तु समय के साथ-साथ उसने अपने आप को बदला और हिन्दुओ सहित अन्य धर्मो में भी अपनी रूचि दिखाई। अकबर ने हिंदु राजपूत राजकुमारी से वैवाहिक भी किया। उनकी एक राणी जोधाबाई राजपूत थी। अकबर के दरबार में अनेक हिंदु दरबारी, सैन्य अधिकारी व सामंत थे। उसने धार्मिक चर्चाओ व वाद-विवाद कार्यक्रमों की अनोखी श्रुंखला आरम्भ की थी, जिसमे मुस्लिम आलिम लोगो की जैन, सीख, हिंदु, नास्तिक, पुर्तगाली एवम् कैथोलिक इसाई धर्मशास्त्रियो से चर्चा हुआ करती थी।
अकबर मुघल साम्राज्य के महान और बहादुर सम्राटो में से एक थे। उन्होंने कभी मुस्लिम और हिंदु इन दो धर्मो में भेदभाव नहीं किया। और अपने साम्राज्य में सभी को एक जैसा समझकर सभी को समान सुविधाए प्रदान की। इतिहास में झाककर देखा जाए तो हमें जोधा-अकबर की प्रेम कहानी विश्व प्रसिद्द दिखाई देती है।




अकबर दी  ग्रेट की कहानी

Updated on 01 May 2017 by Hindipost



              

मुहम्मद अकबर का जन्म १५ अक्टूबर १५४२ को उमेरकोट में हुआ था। अकबर मुगलो में सबसे बड़ा शासक था भारत का। अकबर की ताकत पुरे भारत में फ़ैल चुकी थी और पुरे भारत में मुगलो शासक के दौरान कई इमारते बनाई गई जो आज भी पुरे भारत में मौजूद है। अकबर ने भारत की अर्थव्यवस्था को बेहतर और मज़बूत बनाई थी। अकबर साहित्य के बहुत नज़दीक थे उन्होंने २४००० वॉल्यूम की लाइब्रेरी बनाई जो संस्कृत, हिंदुस्तानी, पर्शियन, ग्रीक, लैटिन और अरबी भाषा में थी। 
अकबर एक बहादुर और शक्तिशाली शासक थे उन्होंने गोदावरी नदी के आस-पास के सारे क्षेत्रो को हथिया लिया था और उन्हें भी मुघल साम्राज्य में शामिल कर लिया था। उनके अनंत सैन्यबल, अपार शक्ति और आर्थिक प्रबलता के आधार पर वे धीरे-धीरे भारत के कई राज्यों पर राज करते चले जा रहे थे। अकबर अपने साम्राज्य को सबसे विशाल और सुखी साम्राज्य बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने कई प्रकार की निति अपनाई जिस से उनके राज्य की प्रजा ख़ुशी से रह सके।

उनका साम्राज्य विशाल होने के कारण उनमे से कुछ हिंदु धर्म के भी थे, उनके हितो के लिए उसने हिंदु सम्राटो की निति को भी अपनाया और मुघल साम्राज्य में लागू किया। वे विविध धर्मो के बिच हो रहे भेदभाव को दूर करना चाहते थे। उनके इस नम्र स्वाभाव के कारण उन्हें लोग एक श्रेष्ट राजा मानते थे। और ख़ुशी-ख़ुशी उनके साम्राज्य में रहते थे। हिन्दुओं के प्रति अपनी धार्मिक सहिष्णुता का परिचय देते हुए उन्होंने उन पर लगा ‘जजिया’ नामक कर हटा दिया। अकबर में अपने जीवन में जो सबसे महान कार्य करने का प्रयास किया, वह था ‘दिन – ए – इलाही’ नामक धर्म की स्थापना। इसे उन्होंने सर्वधर्म के रूप में स्थापित करने की चेष्टा की थी। 1575 में उन्होंने एक ऐसे इबादतखाने (प्रार्थनाघर) की स्थापना की थी, जो सभी धर्मावलम्बियों के लिए खुला था, वो अन्य धर्मों के प्रमुख से धर्म चर्चायें भी किया करते थे।

उनका दरबार सबके लिए हमेशा से ही खुला रहता था। अकबर ने अनेक फारसी संस्कृति से जुड़े चित्रों को अपनी दीवारों पर बनवाया। अपने आरंभिक शासन काल में अकबर की हिन्दुओ के प्रति सहिष्णुता नहीं थी, किन्तु समय के साथ-साथ उसने अपने आप को बदला और हिन्दुओ सहित अन्य धर्मो में भी अपनी रूचि दिखाई। अकबर ने हिंदु राजपूत राजकुमारी से वैवाहिक भी किया। उनकी एक राणी जोधाबाई राजपूत थी। अकबर के दरबार में अनेक हिंदु दरबारी, सैन्य अधिकारी व सामंत थे। उसने धार्मिक चर्चाओ व वाद-विवाद कार्यक्रमों की अनोखी श्रुंखला आरम्भ की थी, जिसमे मुस्लिम आलिम लोगो की जैन, सीख, हिंदु, नास्तिक, पुर्तगाली एवम् कैथोलिक इसाई धर्मशास्त्रियो से चर्चा हुआ करती थी।
अकबर मुघल साम्राज्य के महान और बहादुर सम्राटो में से एक थे। उन्होंने कभी मुस्लिम और हिंदु इन दो धर्मो में भेदभाव नहीं किया। और अपने साम्राज्य में सभी को एक जैसा समझकर सभी को समान सुविधाए प्रदान की। इतिहास में झाककर देखा जाए तो हमें जोधा-अकबर की प्रेम कहानी विश्व प्रसिद्द दिखाई देती है।







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अकबर दी  ग्रेट की कहानी

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मुहम्मद अकबर का जन्म १५ अक्टूबर १५४२ को उमेरकोट में हुआ था। अकबर मुगलो में सबसे बड़ा शासक था भारत का। अकबर की ताकत पुरे भारत में फ़ैल चुकी थी और पुरे भारत में मुगलो शासक के दौरान कई इमारते बनाई गई जो आज भी पुरे भारत में मौजूद है। अकबर ने भारत की अर्थव्यवस्था को बेहतर और मज़बूत बनाई थी। अकबर साहित्य के बहुत नज़दीक थे उन्होंने २४००० वॉल्यूम की लाइब्रेरी बनाई जो संस्कृत, हिंदुस्तानी, पर्शियन, ग्रीक, लैटिन और अरबी भाषा में थी। 
अकबर एक बहादुर और शक्तिशाली शासक थे उन्होंने गोदावरी नदी के आस-पास के सारे क्षेत्रो को हथिया लिया था और उन्हें भी मुघल साम्राज्य में शामिल कर लिया था। उनके अनंत सैन्यबल, अपार शक्ति और आर्थिक प्रबलता के आधार पर वे धीरे-धीरे भारत के कई राज्यों पर राज करते चले जा रहे थे। अकबर अपने साम्राज्य को सबसे विशाल और सुखी साम्राज्य बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने कई प्रकार की निति अपनाई जिस से उनके राज्य की प्रजा ख़ुशी से रह सके।

उनका साम्राज्य विशाल होने के कारण उनमे से कुछ हिंदु धर्म के भी थे, उनके हितो के लिए उसने हिंदु सम्राटो की निति को भी अपनाया और मुघल साम्राज्य में लागू किया। वे विविध धर्मो के बिच हो रहे भेदभाव को दूर करना चाहते थे। उनके इस नम्र स्वाभाव के कारण उन्हें लोग एक श्रेष्ट राजा मानते थे। और ख़ुशी-ख़ुशी उनके साम्राज्य में रहते थे। हिन्दुओं के प्रति अपनी धार्मिक सहिष्णुता का परिचय देते हुए उन्होंने उन पर लगा ‘जजिया’ नामक कर हटा दिया। अकबर में अपने जीवन में जो सबसे महान कार्य करने का प्रयास किया, वह था ‘दिन – ए – इलाही’ नामक धर्म की स्थापना। इसे उन्होंने सर्वधर्म के रूप में स्थापित करने की चेष्टा की थी। 1575 में उन्होंने एक ऐसे इबादतखाने (प्रार्थनाघर) की स्थापना की थी, जो सभी धर्मावलम्बियों के लिए खुला था, वो अन्य धर्मों के प्रमुख से धर्म चर्चायें भी किया करते थे।

उनका दरबार सबके लिए हमेशा से ही खुला रहता था। अकबर ने अनेक फारसी संस्कृति से जुड़े चित्रों को अपनी दीवारों पर बनवाया। अपने आरंभिक शासन काल में अकबर की हिन्दुओ के प्रति सहिष्णुता नहीं थी, किन्तु समय के साथ-साथ उसने अपने आप को बदला और हिन्दुओ सहित अन्य धर्मो में भी अपनी रूचि दिखाई। अकबर ने हिंदु राजपूत राजकुमारी से वैवाहिक भी किया। उनकी एक राणी जोधाबाई राजपूत थी। अकबर के दरबार में अनेक हिंदु दरबारी, सैन्य अधिकारी व सामंत थे। उसने धार्मिक चर्चाओ व वाद-विवाद कार्यक्रमों की अनोखी श्रुंखला आरम्भ की थी, जिसमे मुस्लिम आलिम लोगो की जैन, सीख, हिंदु, नास्तिक, पुर्तगाली एवम् कैथोलिक इसाई धर्मशास्त्रियो से चर्चा हुआ करती थी।
अकबर मुघल साम्राज्य के महान और बहादुर सम्राटो में से एक थे। उन्होंने कभी मुस्लिम और हिंदु इन दो धर्मो में भेदभाव नहीं किया। और अपने साम्राज्य में सभी को एक जैसा समझकर सभी को समान सुविधाए प्रदान की। इतिहास में झाककर देखा जाए तो हमें जोधा-अकबर की प्रेम कहानी विश्व प्रसिद्द दिखाई देती है।