अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन | life story of albert einstein: Hindipost News




अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन

Updated on 01 May 2017 by Hindipost


                    

अल्बर्ट आइंस्टाइन जिनका जन्म १४ मार्च १८७९ को जर्मन में हुआ था। आइंस्टाइन की सबसे बड़ी थ्योरी जो आज दुनिया के सामने है वो है Theory of Relativity
आइंस्टाइन शुरू से ही अपने खोज और उनकी शक्तिशाली बुद्धि से लोगो में जाने जाते थे। आइंस्टाइन लाइट, पदार्थ, गुरुत्वाकर्षण, ब्रह्माण्ड और समय इन सभी उनकी थ्योरी से लोगो में चर्चित रहे है।
आइंस्टाइन की सबसे बड़ी एक Equation है जिसे E = MC2 कहते है यह आज सभी छोटे बच्चो से लेके बड़ो तक सब जानते है।
आइंस्टाइन ने अपनी पूरी ज़िन्दगी में ३०० से ज़्यादा साइंटिफिक पेपर और १५० से ज़्यादा गैर साइंटिफिक पेपर पब्लिश किये थे।

अल्बर्ट आइंस्टाइन का परिवार यहूदी धार्मिक परम्पराओ को नहीं मानता था और इसीलिए आइंस्टीन कैथोलिक विद्यालय में पढने के लिए गये। लेकिन बाद में 8 साल की उम्र में वे वहा से स्थानांतरित होकर लुइटपोल्ड जिम्नेजियम (जिसे आज अल्बर्ट आइंस्टीन जिम्नेजियम के नाम से जाना जाता है) गये, जहा उन्होंने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा ग्रहण की, वे वहा अगले 7 सालो तक रहे, जब तक उन्होंने जर्मनी नहीं छोड़ी।
1894 में, उनके पिता की कंपनी असफल हुई  जिसमे डायरेक्ट करंट (DC) ने अल्टरनींग करंट (AC) छोड़ना बंद कर दिया था। और एक व्यापार की तलाश में, आइंस्टीन का परिवार इटली चला गया। इटली में वे पहले मिलन में रहने लगे और फिर बाद में पाविया गये। जब उनका परिवार में पाविया में रह रहा, तब आइंस्टीन मूनिच में ही अपनी पढाई पूरी कर रहे थे।

उनके पिता आइंस्टीन को एक इलेक्ट्रिकल इंजिनियर बनाना चाहते थे, लेकिन अल्बर्ट आइंस्टीन को वे जिस स्कूल में पढ़ा रहे थे वहा की पढ़ाने की प्रणाली बिलकुल भी पसंद नहीं थी। इसलिए बाद में उन्होंने खुद ही रचनात्मक सुविचारो को लिखना शुरू किया।

अल्बर्ट आइंस्टीन अपने दिमाग में ही शोध का विजुअल प्रयोग कर खाका तैयार कर लेते थे। यह उनके लेबोरेट्री प्रयोग से ज्यादा सटीक होता था। एक पैथोलॉजिस्ट ने आइंन्स्टीन के शव परीक्षण के दौरान उनका दिमाग चुरा लिया था। उसके बाद वह 20-22 साल तक एक जार में बंद रहा।
आइंस्टाइन को कई अवार्ड मिल चुके है जिनमे से Matteucci मैडल, भौतिका नोबेल पुरस्कार, Copley मैडल, Max planck मैडल, Time person of the century यह सभी है।

आइंस्टाइन को नोबल प्राइज भी मिल चूका है भौतिक विज्ञानं में, नोबल पुरस्कार दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार है।

अल्बर्ट आइंस्टीन के कुछ उद्धरण :
१. दो चीजें अनंत हैं: ब्रह्माण्ड और मनुष्य कि मूर्खता; और मैं ब्रह्माण्ड के बारे में दृढ़ता से नहीं कह सकता।
२. क्रोध मूर्खों की छाती में ही बसता है।
३. सूचना ज्ञान नहीं है।
४. ज्ञान से ज्यादा कल्पना जरूरी है।
५. हालात मनुष्य से ज्यादा मजबूत होते है।




अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन

Updated on 01 May 2017 by Hindipost



              

अल्बर्ट आइंस्टाइन जिनका जन्म १४ मार्च १८७९ को जर्मन में हुआ था। आइंस्टाइन की सबसे बड़ी थ्योरी जो आज दुनिया के सामने है वो है Theory of Relativity
आइंस्टाइन शुरू से ही अपने खोज और उनकी शक्तिशाली बुद्धि से लोगो में जाने जाते थे। आइंस्टाइन लाइट, पदार्थ, गुरुत्वाकर्षण, ब्रह्माण्ड और समय इन सभी उनकी थ्योरी से लोगो में चर्चित रहे है।
आइंस्टाइन की सबसे बड़ी एक Equation है जिसे E = MC2 कहते है यह आज सभी छोटे बच्चो से लेके बड़ो तक सब जानते है।
आइंस्टाइन ने अपनी पूरी ज़िन्दगी में ३०० से ज़्यादा साइंटिफिक पेपर और १५० से ज़्यादा गैर साइंटिफिक पेपर पब्लिश किये थे।

अल्बर्ट आइंस्टाइन का परिवार यहूदी धार्मिक परम्पराओ को नहीं मानता था और इसीलिए आइंस्टीन कैथोलिक विद्यालय में पढने के लिए गये। लेकिन बाद में 8 साल की उम्र में वे वहा से स्थानांतरित होकर लुइटपोल्ड जिम्नेजियम (जिसे आज अल्बर्ट आइंस्टीन जिम्नेजियम के नाम से जाना जाता है) गये, जहा उन्होंने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा ग्रहण की, वे वहा अगले 7 सालो तक रहे, जब तक उन्होंने जर्मनी नहीं छोड़ी।
1894 में, उनके पिता की कंपनी असफल हुई  जिसमे डायरेक्ट करंट (DC) ने अल्टरनींग करंट (AC) छोड़ना बंद कर दिया था। और एक व्यापार की तलाश में, आइंस्टीन का परिवार इटली चला गया। इटली में वे पहले मिलन में रहने लगे और फिर बाद में पाविया गये। जब उनका परिवार में पाविया में रह रहा, तब आइंस्टीन मूनिच में ही अपनी पढाई पूरी कर रहे थे।

उनके पिता आइंस्टीन को एक इलेक्ट्रिकल इंजिनियर बनाना चाहते थे, लेकिन अल्बर्ट आइंस्टीन को वे जिस स्कूल में पढ़ा रहे थे वहा की पढ़ाने की प्रणाली बिलकुल भी पसंद नहीं थी। इसलिए बाद में उन्होंने खुद ही रचनात्मक सुविचारो को लिखना शुरू किया।

अल्बर्ट आइंस्टीन अपने दिमाग में ही शोध का विजुअल प्रयोग कर खाका तैयार कर लेते थे। यह उनके लेबोरेट्री प्रयोग से ज्यादा सटीक होता था। एक पैथोलॉजिस्ट ने आइंन्स्टीन के शव परीक्षण के दौरान उनका दिमाग चुरा लिया था। उसके बाद वह 20-22 साल तक एक जार में बंद रहा।
आइंस्टाइन को कई अवार्ड मिल चुके है जिनमे से Matteucci मैडल, भौतिका नोबेल पुरस्कार, Copley मैडल, Max planck मैडल, Time person of the century यह सभी है।

आइंस्टाइन को नोबल प्राइज भी मिल चूका है भौतिक विज्ञानं में, नोबल पुरस्कार दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार है।

अल्बर्ट आइंस्टीन के कुछ उद्धरण :
१. दो चीजें अनंत हैं: ब्रह्माण्ड और मनुष्य कि मूर्खता; और मैं ब्रह्माण्ड के बारे में दृढ़ता से नहीं कह सकता।
२. क्रोध मूर्खों की छाती में ही बसता है।
३. सूचना ज्ञान नहीं है।
४. ज्ञान से ज्यादा कल्पना जरूरी है।
५. हालात मनुष्य से ज्यादा मजबूत होते है।







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Updated on 01 May 2017 by Hindipost


              

अल्बर्ट आइंस्टाइन जिनका जन्म १४ मार्च १८७९ को जर्मन में हुआ था। आइंस्टाइन की सबसे बड़ी थ्योरी जो आज दुनिया के सामने है वो है Theory of Relativity
आइंस्टाइन शुरू से ही अपने खोज और उनकी शक्तिशाली बुद्धि से लोगो में जाने जाते थे। आइंस्टाइन लाइट, पदार्थ, गुरुत्वाकर्षण, ब्रह्माण्ड और समय इन सभी उनकी थ्योरी से लोगो में चर्चित रहे है।
आइंस्टाइन की सबसे बड़ी एक Equation है जिसे E = MC2 कहते है यह आज सभी छोटे बच्चो से लेके बड़ो तक सब जानते है।
आइंस्टाइन ने अपनी पूरी ज़िन्दगी में ३०० से ज़्यादा साइंटिफिक पेपर और १५० से ज़्यादा गैर साइंटिफिक पेपर पब्लिश किये थे।

अल्बर्ट आइंस्टाइन का परिवार यहूदी धार्मिक परम्पराओ को नहीं मानता था और इसीलिए आइंस्टीन कैथोलिक विद्यालय में पढने के लिए गये। लेकिन बाद में 8 साल की उम्र में वे वहा से स्थानांतरित होकर लुइटपोल्ड जिम्नेजियम (जिसे आज अल्बर्ट आइंस्टीन जिम्नेजियम के नाम से जाना जाता है) गये, जहा उन्होंने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा ग्रहण की, वे वहा अगले 7 सालो तक रहे, जब तक उन्होंने जर्मनी नहीं छोड़ी।
1894 में, उनके पिता की कंपनी असफल हुई  जिसमे डायरेक्ट करंट (DC) ने अल्टरनींग करंट (AC) छोड़ना बंद कर दिया था। और एक व्यापार की तलाश में, आइंस्टीन का परिवार इटली चला गया। इटली में वे पहले मिलन में रहने लगे और फिर बाद में पाविया गये। जब उनका परिवार में पाविया में रह रहा, तब आइंस्टीन मूनिच में ही अपनी पढाई पूरी कर रहे थे।

उनके पिता आइंस्टीन को एक इलेक्ट्रिकल इंजिनियर बनाना चाहते थे, लेकिन अल्बर्ट आइंस्टीन को वे जिस स्कूल में पढ़ा रहे थे वहा की पढ़ाने की प्रणाली बिलकुल भी पसंद नहीं थी। इसलिए बाद में उन्होंने खुद ही रचनात्मक सुविचारो को लिखना शुरू किया।

अल्बर्ट आइंस्टीन अपने दिमाग में ही शोध का विजुअल प्रयोग कर खाका तैयार कर लेते थे। यह उनके लेबोरेट्री प्रयोग से ज्यादा सटीक होता था। एक पैथोलॉजिस्ट ने आइंन्स्टीन के शव परीक्षण के दौरान उनका दिमाग चुरा लिया था। उसके बाद वह 20-22 साल तक एक जार में बंद रहा।
आइंस्टाइन को कई अवार्ड मिल चुके है जिनमे से Matteucci मैडल, भौतिका नोबेल पुरस्कार, Copley मैडल, Max planck मैडल, Time person of the century यह सभी है।

आइंस्टाइन को नोबल प्राइज भी मिल चूका है भौतिक विज्ञानं में, नोबल पुरस्कार दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार है।

अल्बर्ट आइंस्टीन के कुछ उद्धरण :
१. दो चीजें अनंत हैं: ब्रह्माण्ड और मनुष्य कि मूर्खता; और मैं ब्रह्माण्ड के बारे में दृढ़ता से नहीं कह सकता।
२. क्रोध मूर्खों की छाती में ही बसता है।
३. सूचना ज्ञान नहीं है।
४. ज्ञान से ज्यादा कल्पना जरूरी है।
५. हालात मनुष्य से ज्यादा मजबूत होते है।